सफ़ेद दाढ़ी का गम


जिंदगी के गम को कुछ यूँ भुलाता हूँ
अपनी सफ़ेद दाढ़ी पे उन के हुश्न का रंग लगाता हूँ.

परमीत सिंह धुरंधर

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