कुँवारे के पहिला हँ प्यार में,
देखले रहनी तहरे में भतार के।
मीठी-मीठी बोलिया से फाँस के,
काट गइला चिरइया के पाँख के।
सारा सपना कइनी तहरे नाम पे,
बाली उमरिया में आके बथान में।
मीठी-मीठी बोलिया से फाँस के,
कइला बदनाम तू जवार में।
रात-रात जागनी तोहरे याद में,
आँसू बहत रहल खाली फरियाद में।
झूठे सपना देखाके दिलवा के,
छोड़ गइला अकेले तू मझधार में।
मीठी-मीठी बोलिया से फाँस के,
काट गइला चिरइया के पाँख के।
भइल बतिया हजार चाँदनी रात में,
तोहरे बिना कुछ भावे ना संसार में।
साथ निभइब कहले रहला कसम खाके,
छोड़ देहलाह हमके बीच राह में।
मीठी-मीठी बोलिया से फाँस के,
काट गइला चिरइया के पाँख के।
गाँव के गलियन में चर्चा हमार बा,
टूटल ई दिलवा अब भइल लाचार बा।
जेकरा खातिर छोड़नी हम पीहर-संसार के,
ओही मोल ना जानल हमार प्यार के।
मीठी-मीठी बोलिया से फाँस के,
काट गइला चिरइया के पाँख के।
अब ना करब हम ऐतबार केहू के बात के,
उठेला दरद जब देखेनी झिलुआ बाग़ में।
तोहरा से जोड़ले रहनी पहिला आस के,
तू तऽ छीन लिहलऽ विश्वास के।
मीठी-मीठी बोलिया से फाँस के,
काट गइला चिरइया के पाँख के।
RSD