The girl in the dark night


The girl in the dark night,
Took my heart on drive.
She chopped my heart,
With her deep, dark eyes.
She kept on driving,
Without giving any hints,
Where and when would it end?
There was no option,
So, did not take any precaution.
The whole night was like a dream,
Still, feeling that steam.
The girl in the dark night,
Took my heart on drive.

Parmit Singh Dhurandhar

The girl with the dark eyes


In the class room,
Right side of the computer,
She was sitting alone,
Reading the Bible.
The girl with the dark eyes,
Like, a full moon in the night.
She kept my heart so high,
All the codes started flying.
She was so much near,
Terminal became a mirror,
And started giving error.
The girl with the dark eyes,
Like, a full moon in the night.

Parmit Singh Dhurandhar

बेगम तुम्हारी, तुमसे सवाल करेंगी


कभी – कभी,
पलके शरारत करेंगी।
कभी – कभी,
पलके क़यामत करेंगी।
तुम हर परिस्तिथि में,
खुद को संभाले रखना।
कभी – कभी, बेगम तुम्हारी,
तुमसे सवाल करेंगी।
तुम दोनों मिलकर,
आगे बढ़ना।
चाँद न मिले तो न सही,
पर दिया जला कर ही खुसी बाटना।
कभी – कभी,
तकरार बेकार लगेगी।
कभी – कभी,
तकरार प्यार भरेगी।
तुम हर परिस्तिथि में,
खुद को संभाले रखना।
कभी – कभी, बेगम तुम्हारी,
तुमसे सवाल करेंगी।

This is regarding Indian arrange marriage where parent of the guy are advising him. They are suggesting on the basis of their own experience. That is the beauty of Indian arrange marriage.

परमीत सिंह धुरंधर

नैहर के खेल हो


हमारा से सैया जी पुछि मत नैहर के खेल हो,
माई कहत रहली बाबुल से एक रात,
की ई लड़की त हाथ से गईल निकल हो.
गऊअन के पंडित – मुल्ला, भड़स हमर पानी,
आ दर्जिया त सिये चोलिया बिना लेले मोल हो.
हमारा से सैया जी पुछि मत नैहर के हमर चाल हो,
रोजे नापी खेता – खेती, चौरा – चौरी, एक सांस में,
अइसन रखले रहनी अहिरन के छोरा संग मेल हो.
बहिना कहलस माई से एक रात हो,
की ए माई, दिदिया त आपन बारी बड़ी बिगड़ैल हो.

परमीत सिंह धुरंधर

सब कुछ छुपा के भी कत्लेआम कइले बारु


पटाखा भइल बारु, पटाखा भइल बारु।
जोबना तहार अइसन, घटा भइल बारु।
एके ही चोलिया के सीए दस बार हो,
जैसे दरजी पिए महुआ रसदार हो.
सब कुछ छुपा के भी कत्लेआम कइले बारु,
छोटका उमरिया में ही घाव कइले बारु।
छपरा – से – मलमलिया एके दिन त कइलू,
लहरा के अचरिया रहिया में आपन,
सबके कलेजा मोह लेले बारु।

This is about a girl who is so beautiful that she is unable to go out. Just one day she went out and the whole word fell for her beauty.

परमीत सिंह धुरंधर

ए इश्क मुझे इस कदर नाकाम बना


हर मोड़ पे मयखाना खोलूँगा,

ए इश्क मुझे इस कदर नाकाम बना,

शौहर को ढूंढते हुए ओ आये बुर्के में,

और कान मरोड़ के ले जाए अपने बच्चे को.

अलविदा ना कहिये,

लौट  के आने का,

मै राह   देखूंगा.

लौट के भी ना आये तो,

कोई गम नहीं,

हर सुबह,

उनके दरवाजे से गुजार जाऊंगा.

कोई दीदार ना हो तो ना हो,

हवावों में उनकी खुसबू से बहल जाऊंगा.

The guy is dreaming to be fail in his love.

परमीत सिंह धुरंधर

झूलती हैं इस कदर मेरे जिस्म पे


मेरी ताजपोशी पे, वो आई संवर के.
पंडतिओं के मंत्र, और वो थी मेरे जेहन में.
बाला की खूबसूरत, मेरी जरुरत बन गयी.
एक ही रात में, सारी धरती जन्नत बन गयी.
अब मिलती है सरे-आम सड़क पे,
और चलती हैं गले को बाहों में थाम के.
की झूलती हैं इस कदर मेरे जिस्म पे, हर घड़ी,
की रोएँ – रोएँ को उनकी चाहत हो गयी.

It about arrange marriage in India…how it change the life of a guy. There is nothing bad in such marriage compare to Love marriage. In fact, it is more romantic and more thrilling.

परमीत सिंह धुरंधर

लहूँ में छलक आते हो


दिलों के फासले, दूरियों से नहीं होते।
मेरी हर सांस में,
हर चाह में तुम छलक आते हो.
हमारा रिश्ता,
शब्दों में नहीं बखान हो सकता,
तुम तो अब मेरी लहूँ में छलक आते हो.
जमाने को क्या बताऊँ ?
की तुम कितने पसंद हो,
अब तो गैरों की बस्ती में भी,
तुम ही नजर आते हो.

परमीत सिंह धुरंधर

ईद


मत पूछ मेरे मालिक, ईद कैसी रही.
शाम  को मिलें, और सुबह का पता न चला.
होंठों पे ऐसी मिठास थी,
की हलक से पानी भी नीचे न गया.
मत पूछ मेरे मालिक, ईद कैसी रही.
मेरी निगाहें तो तटस्थ थीं, मगर सारी रात,
जंग उनके चोली और दुप्पटे में चला.

परमीत सिंह धुरंधर

नया बसंत चाहिए


ग़मों में है ये जिंदगी, इसे प्यार किसी का चाहिए।
ख़्वाबों में ही सही, मगर एक साथ किसी का चाहिए।
टूट रहें है सितारे एक-एक कर,
आसमां को भी अब चाँद एक चाहिए।
कब तक भटकता रहे बादल हवाओं की मस्ती में,
अब इस आवारेपन को भी मुकाम कोई चाहिए।
बिखर गयी पंखुड़ियाँ, बागों से दूर,
अब तो इन डालों पे भी नया बसंत चाहिए।
उमड़ – उमड़ कर नदियां ने देखा सब कुछ तोड़ कर,
अब इन धाराओं को भी कोई बाँधने वाला चाहिए।
ग़मों में है ये जिंदगी, इसे प्यार किसी का चाहिए।
ख़्वाबों में ही सही, मगर एक साथ किसी का चाहिए।

परमीत सिंह धुरंधर