मीर-ग़ालिब को ये जो इल्म होता


ये मस्तियाँ जो रह गयीं ख़्वाबों के नीचे
ये जो इल्म होता तो हम बगीचे में सो लेते।

इश्क का नशा, हैं बस दर्द से भरा
ये जो इल्म होता तो हम यूँ कैद ना होते।

जुल्फ की छावं भी हैं काँटों से भरी
ये जो इल्म होता तो हम आगोस में ना आते.

सारे जहाँ के हुस्न का एक ही रंग है बेवफाई
मीर-ग़ालिब को ये जो इल्म होता तो हम ना कहते।

Rifle Singh Dhurandhar

तो कोई बात है


दुआ की हर रात अधूरी हो, कोई बात नहीं
बाहों में हर रात अधूरी हो, तो कोई बात है.

मौत जहर से हो तो कोई बात नहीं
मौत नजर से हो तो कोई बात है.

वो शहर में सभी की है, तो कोई बात नहीं
वो शहर सिर्फ तुम्हारी हैं तो कोई बात हैं.

Rifle Singh Dhurandhar

ये इल्म होना चाहिए


सभी को अपनी सरहदों का, इल्म होना चाहिए
इश्क़ हो ना हो, मगर ये इल्म होना चाहिए।

लुटते हैं सभी इसमें बस एक नजर से
खंजर चलता नहीं यहाँ, ये इल्म होना चाहिए।

गुस्ताखियाँ कब तक करोगे, अपने माता-पिता से
रिश्ता ऐसा कोई और नहीं, ये इल्म होना चाहिए।

पर्दानशी हो वो या बे-पर्दा, हुक्म उन्ही का चलता है
इस सौदा में नफ़ा नहीं कभी, ये इल्म होना चाहिए।

सितम की रात होगी अभी और, ये अंदेसा है हमें
सितमगर कोई अपना भी होगा, ये इल्म होना चाहिए।

रुखसार पे उनके लाली, ये भी एक सजा है
जो चूमे उसे, उसको भी ये इल्म होना चाहिए।

नफरत की इस दुनिया में मोहब्बत की तलाश में
तन्हाई के सिवा कुछ नहीं, ये इल्म होना चाहिए।

इस दर्दे-दिल को लेकर ही जीना है हमें
हर दर्द की दवा नहीं, ये इल्म होना चाहिए।

हथेलियों की रेखा कहती है की हर साल शहनाई है
कुछ मिले, ये लाजमी तो नहीं, ये इल्म होना चाहिए।

Rifle Singh Dhurandhar

गुरु ही परम ब्रह्म


गुरु ही ब्रह्मा, गुरु ही विष्णु, गुरु ही शिव स्वयं
तो साधो मन गुरु की भक्ति, गुरु ही परम ब्रह्म।

गुरु पाकर ही देव हुए, बिना गुरु रहे दानव समस्त
तो साधो मन गुरु की भक्ति, गुरु ही परम ब्रह्म।

गुरु वशिष्ठ, गुरु विश्वामित्र, तब हुए राम सफल
तो साधो मन गुरु की भक्ति, गुरु ही परम ब्रह्म।

बिना गुरु के कब सफल हुआ कोई धर्म, मोक्ष, करम
तो साधो मन गुरु की भक्ति, गुरु ही परम ब्रह्म।

Rifle Singh Dhurandhar

Future and Past


I can imagine 2050.
But I can not imagine 1050
by reading books of history.

I can imagine technology,
environment, social issues, media in 2050.
But I can not imagine these things in ancient times.

We have lost the proportionality
between the future and the past.

I can imagine family,
children, responsibility in 2050.
But I can not imagine family responsibility in 1050.

We have reduced the diagonal of a picture frame
disproportionate between the present and the past.

Rifle Singh Dhurandhar

We are hotties


Hey guys, you are naughty
We are hotties
Let’s hang together
And make some parties.
You could cook
And we would shake our booties.

We are from the south
And we want some mouth
To grasp fresh air
Without doing any jogging.

We don’t have any dream
So no strings
Just hang together
And make some parties.
You could cook
And we would shake our booties.

Rifle Singh Dhurandhar

Honey, I want to see


Let me be your darling
And wish you
Good morning.
Honey, I want to see
Your smile
Every morning.

I cannot wait
Till the summer
To make our story
Hot and bouncing.
Honey, I want to see
Your smile
Every morning.

Let’s go to jogging
You would be on my left side
And I would be on your right side.
Together, we will do
Things that are sweet and steaming.
Honey, I want to see
Your smile
Every morning.

Rifle Singh Dhurandhar

भज गोविन्दम


भज गोविन्दम, भज गोविन्दम,
भज गोविन्दम रे.
मन की पीड़ा, तन का कष्ट
सब प्रभु हजार लेंगे।

भज गोविन्दम, भज गोविन्दम,
भज गोविन्दम रे.
ना कोई माया है, ना कोई है छल
निमल मन से पुकार लो
प्रभु दौड़े आएंगे।
भज गोविन्दम, भज गोविन्दम,
भज गोविन्दम रे.

चार पहर के मल्ल युद्ध में
जब ग्राह ने छल किया।
भक्त की पीड़ा पे श्रीहरि दौड़े
ना क्षण भर का विश्राम किया।
बस नयनों में नीर को भर लो
प्रभु दौड़े आएंगे।
भज गोविन्दम, भज गोविन्दम,
भज गोविन्दम रे.

मैं तो सुनती तुम्हारी मुरली हूँ


दीप जलाती हूँ, गोविन्द।
पुष्प चढाती हूँ, गोविन्द।
कुछ नहीं मांगती हूँ,
बस दिल लगाती हूँ गोविन्द.
जग समझे तुम्हे मूरत माटी की,
मैं तो सुनती तुम्हारी मुरली हूँ-२.

गीत गाती हूँ गोविन्द,
गुनगुनाती हूँ, गोविन्द
थिरकती हूँ, नाचती हूँ गोविन्द।
जग समझे मीरा, मति हारी
मैं तो सुनती तुम्हारी मुरली हूँ-२.

कैसे रोकूं खुद को तुमसे?
कहाँ कोई दुरी रह गई हम में?
जग समझे मीरा हो गई बावरी
मैं तो सुनती तुम्हारी मुरली हूँ -२.

मेरे मन-ह्रदय से गोविन्द


कब तक छुपोगे इन आँखों से?
कब तक छुप-छुप के रहोगे?
कैसे छुपोगे मेरे मन-ह्रदय से गोविन्द?
कैसे छुपोगे मेरी साँसों से गोविन्द?

Rifle Singh Dhurandhar