लाखों में एक है बिहार मेरा


मैं हूँ बिहारी, लाखों में एक है बिहार मेरा
मुझे भाया ना कुछ जग में इस मिट्टी के सिवा।
कहीं छपरहिया, कहीं पुरवइया, कहीं बटोहिया, कहीं बिदेसिया
नाम अनेक, पर रंग सबका एक बिहार मेरा।
क्या समझेगा ये जमाना दर्द मेरा
चंद सिक्कों की खातिर मैं छोड़ आया वतन मेरा।
मेरे खेत वहीँ, बैल वहीँ, घर वहीँ, माया वहीं
पर मेरे लालच ने मुझको यहाँ बाँध रखा.

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बेवफा


नजर की ख्वाइशें नजर में रह गयी
जो दिल में दबी थी वो दिल में रह गयी.
हम पीते रह गए जिसकी याद में
वो सब मिटा के डोली चढ़ गयी.
कुछ भी नहीं इश्क़ में एक धोखा के सिवा
और बेवसी देखिये की बेवफा को कलम वफ़ा लिख गयी.

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मिला ना मुझको दर्द का वो हिस्सा जिंदगी


मिला ना मुझको दर्द का वो हिस्सा जिंदगी
ग़ालिब ने लिखी बैठ के जिसे सारी जिंदगी।

बहुत दिनों की अय्यासी ने बस एक खालीपन दिया
चार दीवारों के बीच तन्हाई और भीड़ में अकेलापन दिया।
वक्त रहते संभाल न सका मैं अपने पावों को
तो गुजरते वक्त ने बस एक सूनापन दिया।

खवाबों तक ही रह गयीं आपके लिए मेरी प्यास
निगाहें मिली, बरसात भी हुई, पर मिट ना सकी ये आग.
जा तुझे छोड़ रहा हूँ तेरी ही ख़ुशी के लिए
तू किसी की भी बाहों में झूले, पर ना मिलेगी मेरी बाहों की मिठास।

वो अपनी मोहब्बत के तारे गिन रहे हैं
और हम शहर में उनके सहारे जी रहें हैं.

भंवर-भाँवर में पंवर -पंवर के
चंवर – चाँवर में चहल -चहल के
देख लेहनी, मिलल ना कोई तहरा जइसन
चुम्बक लागल बा जेकरा कमर में.
नहर -नाहर में छान-छुन के
पोखर -पखार के लांघ-लूंग के
देख लेहनी, मिलल ना कोई तहरा जइसन
चुम्बक लागल बा जेकरा कमर में.

RSD


चोर मांगे चोरी से यार बलजोरी से
भतरा करता मुँहजोरी रे.
अरे केकरा से कहीं सखी
कहवाँ हाँ जाके?
रोजे मांगता हमार ढोंढ़ी रे.
अरे बैल बहे खेती में
खाके घास नादि में.
भतरा रहता चुहानी में
अरे केकरा से कहीं सखी
कहवाँ हाँ जाके?
रोजे मांगता हमार ढोंढ़ी रे.
अरे बच्चा खेले गोदी में
लइका खेले गाछी में
भतरा करता बस आँगन-दुआरी रे
अरे केकरा से कहीं सखी
कहवाँ हाँ जाके?
रोजे मांगता हमार ढोंढ़ी रे.

RSD

Dew


I want to be with you
Make me your morning dew.
You are green like grass
I want to be on top of you.

RSD

बूढ़े भी जवान है


ये इश्क़ का रंग है जो बूढ़े भी जवान है
तू चले लहरा के तो झूमता आसमान है.
और कौन है आस – पास जो कोई ख्वाब ले
एक तेरे चोली के रंग पे लूट रहा मेरा बिहार है.

जुल्मी के पाइयाँ, जुल्मी के पाइयाँ परे नई रतिया सारी
रात भर खेले पिया, ह छपरा के खिलाडी।
मारेला गरहिया में मछली जाल डाली
रात भर खेले पिया, ह छपरा के खिलाडी।
धीमी -धीमी आँच पे डभकाये रतिया सारी
रात भर खेले पिया, ह छपरा के खिलाडी।

तहरा प्यार में भइल बानी बेकार राजा जी,
हमरा चोलिया के खोल दी आज रात राजा जी.
तन्वा ना मनवा में भी ताप बढ़ता,
जाइ कौना वैधा के पास राजा जी.

का देख के बाबुल हमर चुन देहलन बिहारी
ना कउनो सुहुर बाते ना रहल जिमींदारी।
ऐसे मत कहा बबुनी खून के ह खाटी
रामाश्रय सिंह के पोता ह, चंद्रदेव सिंह के नाती।
ना छोड़ी साथ तहर, चाहे रहल ना जमींदारी।

जिसे तेरी अधरों की चाहत, वो जमाना होगा
जिसे तेरी आँखों की चाहत, वो ग़ालिब का फ़साना होगा।
हम बिहारी हैं, या मिट जाएंगे या तेरी वक्षों पे हमारा आसियाना होगा।
हम बिहारी हैं, हमारे आगे तख्तो-ताज भी कुछ नहीं
हमसे टकराने से पहले खुदा के माथे पे भी पसीना होगा।

दर्द नहीं दिल की दवा दे
बाहों में ना सही, दूर से देख के मुस्करा दे
अब भी मेरी किताबों में तेरी ही तस्वीर है
मुझे न सही, उसे अपने सीने से लगा ले.
दिन भी किसी और का, रात भी किसी और की
ये चूड़ी, कंगन, मेहँदी, और बच्चे भी किसी और के
ये जालिम कम -से-कम, एक टैटू तो मेरे नाम का बनवा ले.

तेरी आँखों का एक रंग मुझे बड़ा मीठा सा लगे
जब तू अपने बाबुल के पीछे छिप के मुस्कराने हाँ लगे.

ख़्वाबों से हकीकत में -२, जो तुम उतर जावों
दास्ताने मोहब्बत में फिर तन्हाई न होगी।
एक घडी ही सही तुम जरा पास आके बैठों
बिहार में हमारे फिर गरीबी ना होगी।

मेरी जान इशारा कर दे तू अपनी इन नजरों से
सब कुछ चढ़ा दूंगा मैं तेरे चढ़ते जोबन पे
तू भी हैं लाखों में लिए हाँ ादाएँ
और मैं भी आगे हूँ अपना सबकुछ लुटाने में.

मुझे तुम्हारी इन आँखों से कोई तो एक ख्वाब मिले
फिर ना मिले ये जहाँ, पर एक जाम तो मिले।
बंध चुके हैं सभी इसमें, किसी एक को तो आसमाँ मिले।
खुदा लिखना कभी वो किस्मत जिसमे कोई लड़की परेशान मिले।
बस एक टुटा ही नहीं हूँ मैं, बाकी सारे अरमान मिटे।
एक हम ही तड़पते रहे इस जहाँ में, बाकी सब हुनरमंद -होशियार मिले।

आज आये हो तो कल का बहाना ना दो,
चांदनी रात को यूँ सुनी जाने ना दो.
मेरी आँखे सदा देखती हैं ख्वाब तेरा
इन आँखों से ये ख्वाब मिटने ना दो.
पहले से ही टूटा हूँ और कितना तोड़ोगे
ठुकराने से पहले इतना बता भी तो दो.
हमें दर्द की आदात हो गयी हैं
एक दवा छोड़ के तुम कुछ भी पिला दो.

मेरी कलम ने लिखा है तेरी कमर पे तिल है
तू झुठला दे, पर ये ही सच है, की वही मेरा दिल है.

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नजर की ख्वाइशें


नजर की ख्वाइशें, नजर में रह गयी
जो दिल में दबी थी, वो दिल में रह गयी.
हम पीते रह गए जिसकी याद में
वो सब मिटा के हाँ, डोली चढ़ गयी.
कुछ भी नहीं इश्क़ में एक धोखा के सिवा
और बेबसी देखिये की बेवफा को
कलम वफ़ा लिख गयी.
सोचा की दिल को संभल लेंगे, दिल को
संभाला ही था की वो फिर सामने दिख गयी.

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तेरे अंगों पे कहीं पटना,कहीं छपरा तो कहीं सीवान दीखता है


तू मुस्कराये तो पुरे के पुरे मानचित्रा पे
पूरा -का – पूरा बिहार दीखता है.
तुम्हारे मम्मी -डैडी पूजनीय ही नहीं
सिर्फ मेरे लिए भगवान् ही नहीं
तुम्हारे मम्मी -डैडी, दादा-दादी, भाई-बहन
उनमे पूरा -का-पूरा ससुराल दीखता है.
तू शर्माए तो वो सर्दी की रात
वो बोरसी की आग
और उसमे पकता वो लिट्टी दीखता है.
तेरे नयन जैसे मेरे गावँ के पोखर
तेरी कमर, जैसे चलनी में चोकर
तेरी कमर पे झूलती ये चोटी
पीपल पे वो मेरा झूला दीखता है.
तू पूरी -की-पूरी मुझे मिल जाए
तो मुझसे धनवान कौन, बता?
की तेरे अंगों पे कहीं पटना,
कहीं छपरा तो कहीं सीवान दीखता है.

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जय गणपति, जय-जय गणपति


जय गणपति, जय-जय गणपति
जय-जय गणपति, जय-जय.
दया करों हे गणराज, आपके चरणों में हूँ मैं.
दिव्या नयन है, विशाल कर्ण है
फिर क्यों है मेरी विनती अनसूनी।
आप ही एक हो जिसके सहारे
उतड़ आया हूँ रणभूमि।
अब तो तिलक लगा दो विजय श्री का
आपके चरण धोऊंगा मैं.
जय गणपति, जय-जय गणपति
जय-जय गणपति, जय-जय.

तेरे नयनों में रंग बहार के है


मेरी आँखों का हैं तू ही नशा
मैं देख रहा हूँ तुझको रात-रातभर
आसमा के तले.
कोई तितली सी, उड़ कर कभी
छू गयी मेरे दिल को अपने पंखों से
मैं भुला नहीं आज तक
वो टकराई थी आके जो मेरी राहों में.

तुम्हारी जवानी एक मीठी आंच है
जिसपे रोटी पक जाए, सब्जी बन जाए
दाल-चावल सब पक जाए
फिर भी जो सुलगती हर रात है.
तुम्हारा हुस्न एक तेज़ाब है
जिसे जो छू ले, वो जलता हर एक रात है.

तुम सवरों तो बादलों में बिजली है
तुम चलों तो बलखाती हिरणी है
तुम्हारी झुकी पलके जैसे ठहरी हुई नागिन
हम तेरे करीब आने की दुआ भी करें तो क्यों ?
तेरे करीब से जजों भी गुजरा वो मयखाने में साथी है.
तुझे मांगें भी खुदा से तो क्या ?
कहहुदा खुद तुम्हे बना के फंस गगया अपनी चाल है.

तुम्हारी किताबों में मेरा एक पन्ना है
समय मिले तो पढ़ लेना, लिखा कुछ अच्छा है
तुम बैठती हो अपनी सहेलियों से लिपट कर
जो अगली पंक्ति में
हमने जाना की लड़की होना भी कितना अच्छा है
सुबह-सुबह जब तुम आती हो
खुली भींगी जुल्फों में फूल लगाकर
सौ साल की जिंदगी से एक दिन का खिलना कितना अच्छा है.

खूबसूरत है जवानी
तो तुम मेरी रानी
सहोगी मनमानी
अब रात भर, अब रात भर.

कौन कहता है हुस्ना वेवफा है
ये भी तो अरे उसकी एक अदा है.

केकरा से कही जाके ससुरा के हाल रे
सैयां अनाड़ी बारां, देवरा चालाक रे
दिन भर बइठल रहे छनि पे चढ़ के
सैया खटस कहता, देवरा इ खाट पे.

हसीं तेरी चाहत में यूँ तो नग्मे हज़ार मिलें
सबमे टुटा था पर दिल, आशिक सारे बीमार मिले
तूने लुटा एक-एक को ऐसे, जैसे उषा तिमिर को हरे
जिसने भी पुकारा तुझे वो तड़पते लाचार मिले।
तुझको भोगा जिसने, उसे क़द्र ना तेरी
जिसने क़द्र की तेरी वो बिकते बाज़ार मिले।

जब तक तू दूर है मेरी है
जब तू मेरी है तो दूर कहाँ?

तेरे नयनों में रंग बहार के है
मैं बिहार का हूँ तू चल मेरे साथ.
तू मुस्काये तो धुप खिल जाए
मैं कांधों पे लिए हल हूँ, तू चल मेरे साथ.
तेरी जुड़ों में फूल जैसे लिट्टी में घी
तुहे पीना है सतुआ तो आजा मेरे साथ.
जिस मिट्टी से राजेंद्र प्रसाद और जयप्रकाश
तुझे बसाना हो ससुराल छपरा तो आजा मेरे साथ.

तेरे सफर की तन्हाईयाँ मंजिल पे तेरी शहनईया हैं
किस्मत से जंग में मेरे दोस्त, फतह से पहले सिर्फ और सिर्फ रुस्वाइयाँ है.
चल, सिर्फ चल बिना थकान और मंजिल के चिंता के
तेरे कदम को चूमने वाले कांटें परिछाइयाँ हैं.

जोगी तहरा से मिले आयें सांझ के
सैया रहे लागल बारां घरे रात के.
ऐसे मत जा छोड़ के हमारा गावं के
के बरसाई अब बरखा प्यार के.
अभी खा ल सखी के हाथ से दाल-भात के
आएम त खिलायेम पुआ छान के
भय, भय टांको नइखे अब देह में
कहब त भागचलेम तहरा ही साथ में.

खुदा ने लिखा सबसे महँगी मोहब्बत मेरे लिए
बस मेरी किस्मत में दौलत को लिखना भूल गया
खुदा ने तरासा उनके जिस्म को बारीकी से मेरे लिए
बस मुझको तरसना भूल गया
खुदा ने मुझे दी सीरत और उनके दिल में
सीरत की चाहत डालना भूल गया
खुदा ने बनाई शादी की लकीरें मेरे और उनके दोनों ही के हाथों में
मगर जन्नत में ये जोड़ी लिखना भूल गया.

मैं तड़पता रहा जिस प्यास को लिए
तुम उस दरिया को लिए बैठी रही
ना प्यास मिटा, ना दरिया सूखी
मोहब्बत यूँ ही अधूरी रही

RSD