मेरे आगे मोहब्बत में खुदा भी छोटा पड़ गया है,
की उसने तो सिर्फ बनायीं जवानी उनकी, मैंने तो हर वार झेला है.
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मेरे आगे मोहब्बत में खुदा भी छोटा पड़ गया है,
की उसने तो सिर्फ बनायीं जवानी उनकी, मैंने तो हर वार झेला है.
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कई फैसले जिंदगी के रुलाते हैं हर घडी
ना कोई सुकून हैं, ना कोई मंजिल ही.
इंसान को हर पल में सोचना है यही
की कितनी प्यास है और कितना पीना है जरुरी?
ता उम्र मैं भागता रहा जिन चाहतों के पीछे
पाकर उनको भी प्यास मिटती तो नहीं।
ए खुदा क्या लिखी है किस्मत मेरी?
हर दर्द की दवा है, बस मेरे ही दर्द की नहीं।
मुस्करा रहा है वो आज भी मुझे ही देख कर
की वक्त के साथ हालात मेरे बदलते ही नहीं।
हुस्न की वेवफाई पे कितना लिखूं ?
एक रात के बाद वो पहचानता भी नहीं?
कस्मे-वादे पे ना जाइये इनके, इनके आँचल में,
फरेब के आलावा कुछ मिलता भी नहीं।
क्या सोच कर हुस्न को बनाया था खुदा, ये बताना कभी?
जिस दर्द में हम जी रहे हैं, क्या उसे उठाया है कभी?
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पिता तुम्हारी चरणों में शत -शत बात नमन मेरा
मैं लौटूंगा समूल मिटा के हूणों का कुल-बल सारा।
क्षण भर भी मुझे मोह नहीं सत्ता के इस सुख का
अक्षुण्य रखूँगा मगध को बस ये ही हैं स्वप्न मेरा।
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बेइन्तहा मोहब्बत की
मंजिल सिर्फ तन्हाई है
आज जिनकी बाहों में तुम हो
कल उनसे ही तुम्हारी जुदाई है.
रुत बदल जाए, रब बदल जाए
जहाँ पतझड़ है, वहाँ बहार भी आ जाए.
मगर मौत के अलावा
ना इस दर्द की कोई दवाई है.
बेइन्तहा मोहब्बत की
मंजिल सिर्फ तन्हाई है.
तुम ना समझे
तो ये तुम्हारी नादानी है.
वो समझ गए
तो उनकी किस्मत में शहनाई है.
जितना पुकार लो
ना लौट के कोई आएगा।
जिंदगी में बस एक ही बार
होती ये सगाई है.
बेइन्तहा मोहब्बत की
मंजिल सिर्फ तन्हाई है.
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इस दीन की कुटिया पे, हे माँ आती रहो
बसंत-पंचमी पे ही नहीं, हर दिन आती रहो.
कुछ भी नहीं हैं माँ, जो चरणों में अर्पण कर दूँ,
पर शीश पे मेरे माँ, अपना हाथ रखती रहो.
धूल-धूसरित रहूं, या यूँ ही अध्-खिला
जैसे चाहो माता इस जग में रख लो हाँ.
पर कंठ पे मेरे, मस्तिक में मेरे,
माँ सवारी करती रहो.
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जिसकी जुल्फों में बंधने को पुष्प-पवन है बेकरार
वो संयोगिता पूछती है कहाँ हो मेरे पृथ्वीराज?
जिसके मुख के आभा से चंद्र हुआ है परास्त
वो संयोगिता पूछती है कहाँ हो मेरे पृथ्वीराज?
हार रही है दुखियारी, टूट रहा मन का हर आस
प्रीत परायी हो जाए, उसके पहले रख लो लाज.
कहाँ हो मेरे पृथ्वीराज? कहाँ हो मेरे पृथ्वीराज?
RSD
जिसके नजर के इन्तजार में
टूटा हैं दर्पण कई बार.
वो संजोगिता पूछ रही है
कहाँ हो मेरे पृथ्वीराज?
भारत के कण-कण पे अपने बाजुबल से
लिख रहे है पल-पल में नया इतिहास।
मगर मेरे दिल का हाल
कब समझोगे, मेरे चौहान?
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My dream for you is not dependent
Whether I am sleeping or not.
My desire for you is not dependent
Whether you are with makeup or not.
We might not be together tomorrow,
As change is the key to evolution.
But my heartbeats for you are not dependent
Whether you are mine or not.
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माँ की ममता और पिता का दुलार,
संसार में बस ये ही दो हैं भगवान्।
फिर भी मन भटकता है, कितनो के द्वार
बस पाने को जीवन में प्यार।
माँ की ममता और पिता का दुलार,
संसार में बस ये ही दो हैं भगवान्।
ये ही मेरे शिव हैं, ये ही मेरे विष्णु
इनकी चरणों में हैं चरों मेरे धाम.
माँ की ममता और पिता का दुलार,
संसार में बस ये ही दो हैं भगवान्।
और किसने लुटाये हंस-हंस के अपने स्वप्न
और कर दी तुमपे अपनी खुशियाँ निसार।adher
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हे ग़ालिब, उनके हुस्न पे तुम क्या लिख रहे हो?
जो भी लिख रहे हो, मेरा दिल लिख रहे हो.
जानता शहर है की जीना है मुश्किल।
मेरे इस दर्द को ही तुम दवा लिख रहे हो.
हे ग़ालिब, उनके हुस्न पे तुम क्या लिख रहे हो?
जो भी लिख रहे हो, मेरा दिल लिख रहे हो.
कैसे हाँ ढूँढू अब कोई रास्ता
मेरी हर राह पे तुम उनका घर लिख रहे हो.
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