छरहरी


अभी तुम हसीन हो, अभी नाजुक बड़ी हो
अभी मिलेंगे तुमको गली-गली में मजनू।

अभी तुम नई हो, कातिल छरहरी हो
अभी तुम्हारे लिए चमकेंगे सारे जुगनू।

जिधर तुम डाल दो अपनी ये दिलकस नजर
उधर ही बैठे हैं तुमपे लुटाने को सभी आबरू।

Rifle Singh Dhurandhar

पेंच होता है


प्रेम होता है जिस्म से और दिल रोता है
नजर के खेल में बस ये ही पेंच होता है.

रोकने से रुक जाए ये मुमकिन नहीं
बेवफाओ का बस ये ही अंदाज होता है.

Rifle Singh Dhurandhar

ये जो इल्म होता


दर्द में मैं नहीं तू भी है साकी
ये जो इल्म होता तो तुझे बेवफा ना कहते।

होते हैं रंगबाज सभी छपरइया
ये जो इल्म होता तो हमसे ना टकराते।

जूनून आज भी है मुझे बुढ़ापे में
ये जो इल्म होता तो वो घूँघट ना उठाते।

शौक कई पाल रखे हैं दिल में
ये जो इल्म होता तो वो ना मुस्कुराते।

Rifle Singh Dhurandhar

कच्ची है प्रेम की डोर


मदिरा मेरे कंठ से उतर कर कर गयी दिल पे जोर
छोटी सी इस जिंदगी में कितनी कच्ची है प्रेम की डोर?

शाम को जो पुलकित-पुष्प थी, काँटे हो गयी होते भोर
छोटी सी इस जिंदगी में कितनी कच्ची है प्रेम की डोर?

Rifle Singh Dhurandhar

मीर-ग़ालिब को ये जो इल्म होता


ये मस्तियाँ जो रह गयीं ख़्वाबों के नीचे
ये जो इल्म होता तो हम बगीचे में सो लेते।

इश्क का नशा, हैं बस दर्द से भरा
ये जो इल्म होता तो हम यूँ कैद ना होते।

जुल्फ की छावं भी हैं काँटों से भरी
ये जो इल्म होता तो हम आगोस में ना आते.

सारे जहाँ के हुस्न का एक ही रंग है बेवफाई
मीर-ग़ालिब को ये जो इल्म होता तो हम ना कहते।

Rifle Singh Dhurandhar

तो कोई बात है


दुआ की हर रात अधूरी हो, कोई बात नहीं
बाहों में हर रात अधूरी हो, तो कोई बात है.

मौत जहर से हो तो कोई बात नहीं
मौत नजर से हो तो कोई बात है.

वो शहर में सभी की है, तो कोई बात नहीं
वो शहर सिर्फ तुम्हारी हैं तो कोई बात हैं.

Rifle Singh Dhurandhar

ये इल्म होना चाहिए


सभी को अपनी सरहदों का, इल्म होना चाहिए
इश्क़ हो ना हो, मगर ये इल्म होना चाहिए।

लुटते हैं सभी इसमें बस एक नजर से
खंजर चलता नहीं यहाँ, ये इल्म होना चाहिए।

गुस्ताखियाँ कब तक करोगे, अपने माता-पिता से
रिश्ता ऐसा कोई और नहीं, ये इल्म होना चाहिए।

पर्दानशी हो वो या बे-पर्दा, हुक्म उन्ही का चलता है
इस सौदा में नफ़ा नहीं कभी, ये इल्म होना चाहिए।

सितम की रात होगी अभी और, ये अंदेसा है हमें
सितमगर कोई अपना भी होगा, ये इल्म होना चाहिए।

रुखसार पे उनके लाली, ये भी एक सजा है
जो चूमे उसे, उसको भी ये इल्म होना चाहिए।

नफरत की इस दुनिया में मोहब्बत की तलाश में
तन्हाई के सिवा कुछ नहीं, ये इल्म होना चाहिए।

इस दर्दे-दिल को लेकर ही जीना है हमें
हर दर्द की दवा नहीं, ये इल्म होना चाहिए।

हथेलियों की रेखा कहती है की हर साल शहनाई है
कुछ मिले, ये लाजमी तो नहीं, ये इल्म होना चाहिए।

Rifle Singh Dhurandhar

गुरु ही परम ब्रह्म


गुरु ही ब्रह्मा, गुरु ही विष्णु, गुरु ही शिव स्वयं
तो साधो मन गुरु की भक्ति, गुरु ही परम ब्रह्म।

गुरु पाकर ही देव हुए, बिना गुरु रहे दानव समस्त
तो साधो मन गुरु की भक्ति, गुरु ही परम ब्रह्म।

गुरु वशिष्ठ, गुरु विश्वामित्र, तब हुए राम सफल
तो साधो मन गुरु की भक्ति, गुरु ही परम ब्रह्म।

बिना गुरु के कब सफल हुआ कोई धर्म, मोक्ष, करम
तो साधो मन गुरु की भक्ति, गुरु ही परम ब्रह्म।

Rifle Singh Dhurandhar

Future and Past


I can imagine 2050.
But I can not imagine 1050
by reading books of history.

I can imagine technology,
environment, social issues, media in 2050.
But I can not imagine these things in ancient times.

We have lost the proportionality
between the future and the past.

I can imagine family,
children, responsibility in 2050.
But I can not imagine family responsibility in 1050.

We have reduced the diagonal of a picture frame
disproportionate between the present and the past.

Rifle Singh Dhurandhar

We are hotties


Hey guys, you are naughty
We are hotties
Let’s hang together
And make some parties.
You could cook
And we would shake our booties.

We are from the south
And we want some mouth
To grasp fresh air
Without doing any jogging.

We don’t have any dream
So no strings
Just hang together
And make some parties.
You could cook
And we would shake our booties.

Rifle Singh Dhurandhar