पप्पू जी हउअन हमार ड्राइवर
और पीया खलासी हो.
पप्पू जी हउअन हमार तेजतर्रार
और पीया अनाड़ी हो.
Rifle Singh Dhurandhar
पप्पू जी हउअन हमार ड्राइवर
और पीया खलासी हो.
पप्पू जी हउअन हमार तेजतर्रार
और पीया अनाड़ी हो.
Rifle Singh Dhurandhar
आवो गोरैया
खावो गोरैया
चाहको मेरी बगिया में
मुझको भी कुछ सुनावो गोरैया।
कैसी है ये दुनिया?
और कैसा ये आसमान?
रंग क्या हैं ये, जो है सुबहों -शाम?
मुझे भी ज़रा बतलाओ गोरैया।
तुम तो उड़ जाती हो अपनी चाह में
मैं बंधा हूँ यहाँ जाने किसकी आस में?
कभी मेरे भी दिल को
अपनी आदाओं से बहलावो गोरैया।
शहर -गावं तुमने देखा
डाल -डाल पे तुमने डेरा डाला
इस घनघोर वीरान में हो अगर कोई पथ
तो पथप्रदर्शक बनकर मुझे पथ दिखावो गोरैया।
Rifle Singh Dhurandhar
दिल का अनाड़ी
शहर में खिलाडी
करता हूँ साइकल की सवारी
ऐसा मैं बिहारी
ना अटकी है, ना अटकेगी
कहीं भी, कभी भी अपनी गाड़ी।
छपरा का छबीला
पटना का बादशाह
मराठों संग सजाई थी सल्तनत अपनी
ऐसा मैं बिहारी
ना अटकी है, ना अटकेगी
कहीं भी, कभी भी अपनी गाड़ी।
उस्तादों को पटका
हुस्नवालों को रंगा
दोस्तों का हूँ यार जिगड़ी
ऐसा मैं बिहारी
ना अटकी है, ना अटकेगी
कहीं भी, कभी भी अपनी गाड़ी।
भीड़ में अकेला
अकेले में भीड़
दोस्तों ने कहा, “मानुस है भारी”
ऐसा मैं बिहारी
ना अटकी है, ना अटकेगी
कहीं भी, कभी भी अपनी गाड़ी।
Rifle Singh Dhurandhar
ना भींगा करों ऐसे बरसात में
तड़प उठता है Crassa ऐसी रात में.
तुमको तो मिल गए हैं साथी कई
रह गया मैं ही अकेला इस राह में.
कैसे सम्भालूं एक बार बता दे मुझे?
ज़िंदा हूँ मैं बस इसी एक आस में.
कैसे उठाऊं ये गम, ए दिल बता?
हर रात निकालता है वही एक चाँद रे.
रह गया एक राजपूत नाकाम हो के
इश्क़ ने ऐसे जलाया आग में.
ऐसे ना लड़ा मुझसे अँखियाँ गोरी
बदनाम हूँ शहर में किसी के नाम से.
Rifle Singh Dhurdhar
कोई हक़ नहीं, कोई शक नहीं
ये मोहब्बत का कैसा दौर आ गया है?
कोई हया नहीं, कुछ बयाँ नहीं
ये हुश्न इस कदर बेनकाब हो गया है.
वो कहते हैं की हमें
जीने का सलीका नहीं आया
उनके शहर से लौटें है
सबकी जुबाँ पे उनका नाम आम हो गया है.
क्यों ना हो?
उन्हें जीने की और लालसा
दिल में कोई और
बाहों में अब कोई और आ गया है.
मुझे सत्ता से क्या हटाओगे?
अपने पिता की तस्वीर हटा कर.
तुम्हे देखकर सबको
वही पुराना जंगलराज फिर याद आ गया है.
उद्धव से कह दो
कब तक अहंकार पालोगे?
तुम्हे झुकाने को अंगद-रूपी अर्नब आ गया है.
Rifle Singh Dhurandhar
अरे मरदा बोले मोदी, माउगि वो बोले मोदी
सुन हो भैया, फेनु मोदी के सरकार ही नु बनी।
बुढ़वो चुने मोदी, जवनका भी चुने मोदी
सुन हो भैया, पूरा बिहार मोदी के ही त चुनी।
घूँघट में भी मोदी, मूँछवा पे भी मोदी
सुन हो भैया, बिहार में कमल ही खिली।
ना मिलिअन पप्पू, ना दिखिअन फिर पप्पू
सुन हो भैया, बिहार में कमल ही खिली।
Rifle Singh Dhurandhar
हे गोरी तेरी पतली कमर पे अब भी
रखता हूँ निशाना दिल का.
मैं टूटा हूँ फिर भी
ख्वाब टूटा नहीं है दिल का.
Rifle Singh Dhurandhar
टूटती हैं चूड़ियाँ मोहब्बत में
तकरार में, प्रहार ना कीजिये।
Rifle Singh Dhurandhar
ना शहर मेरा, ना राहें मेरी
ए जिंदगी, कैसे सम्भालूं तुझे?
ना चाँद मेरा, ना तारें मेरे
ए जिंदगी, कैसे सजाऊँ तुझे?
पुकारूँ किसे, बताऊं किसे?
जो दर्द हैं दिल में मेरे।
ना बाग़ मेरा, ना बहारें मेरी
ए जिंदगी, कैसे बहलाऊँ तुझे।
भटकना ही है किस्मत मेरी
भटकना ही है मंजिल मेरी।
ना सुबहा मेरी, ना रातें मेरी
ए जिंदगी, कैसे ठहराऊँ तुझे।
सावन में हूँ एक पतझड़ सा मैं
राहों में हूँ सबके एक कंकर सा मैं.
ना साथी कोई, ना साथ कोई,
ए जिंदगी, किसे सुनाऊँ तुझे?
Rifle Singh Dhurandhar
जिंदगी जहाँ पे दर्द बन जाए
वहीँ से शिव का नाम लीजिये।
अगर कोई न हो संग, राह में तुम्हारे
तो कण-कण से फिर प्यार कीजिये।
राम को मिला था बनवास यहीं पे
तो आप भी कंदराओं में निवास कीजिये।
माना की अँधेरा छाया हुआ हैं
तो दीप से द्वार का श्रृंगार कीजिये।
जिंदगी नहीं है अधूरी कभी भी
तो ना अपहरण, ना बलात्कार कीजिये।
माना की किस्मत में अमृत-तारा नहीं
तो फिर शिव सा ही विषपान कीजिये।
Rifle Singh Dhurandhar