जिस पल से मिले हो तुम सैंया,
सजने लगी हूँ, मैं छुप-छुप के.
पराया लगे है, अब बाबुल,
रहने लगी हूँ, मैं घूँघट में.
एक तेरी नजर की आशा में,
जलता है तन-मन मेरा,
एक नजर जो तू देख ले,
खिल जाता है अंग-अंग मेरा.
जिस पल से मिले हो तुम सैंया,
खुश रहने लगी हूँ, मैं बंद दरवाजों में.
सौतन लगती है, अब सखियाँ,
राज दबाने लगी हूँ, मैं सीने में, परमित.
Category: Love
Every thing is related to love and beauty
तो क्या करेगा दर्पण
सोच-सोच कर,
छू लेता है,
अम्बर,
मेरा मन.
जब हम होंगे,
तुम होगे,
तो, कैसा
होगा उप्वन.
आज भी,
सजती,
होगी तुम,
देख कर आइना.
जब हम होंगे,
और तुम होगे,
तो, क्या
करेगा दर्पण, परमित।
दर्द
अगर तेरे दर्द पे, मचल जाये जमाना,
तो समझ ए दिल, तू दीवाना है दीवाना, परमित.
दिल
इन आसुंवों का क्या करें,
जो आज भी निकलती हैं,
तेरी ही चाह में.
कम्बखत ये दिल समझता ही नहीं,
की तुमने बसा लिया है,
किसी और को अपने दामन में,परमित
माँ
बहुत दूर तक फैलने से अच्छा है,
तेरी गोद में सिमट के रह जाऊं,
ए माँ , तेरा आँचल में हर दर्द सह जाऊं,परमित.
प्यासा है परमित.
तेरी मस्त निगाहों से, हाँ पी कर देखा है,
दिल जलता है रातों में, जब होता अकेला है.
चाँद की चांदनी, भाती नहीं मुझे अब,
जब से तेरे रूप का नजारा देखा है.
मदिरा को भी पी कर, प्यासा है परमित,
जब से तुझको ओठों , से लगाकर देखा है.
झोपडी में गणित.
सखा, बंधू, न मित्र चाहिए,
एक घर और भाई-बहन का संगीत चाहिए।
हँसते रहें, हंसाते रहें,
थक जाएँ, तो गणित पढ़ाते रहें।
धन, दौलत, न जन्नत चाहिए,
झोपडी में भी, भाई-बहन का साथ चहिये.
खाते रहें, खिलातें रहें,
थक जाएँ, तो गणित पढ़ाते रहें, परमित।
तुम हो दिल में,
तुम इस कदर उतर गये हो दिल में,
अब क्या रखा है खोंने में.
तुम अगर मिल जावो हमें,
क्या रखा है फिर ज़माने में.
हर साँस की मेरी तुम ही चाहत,
हर रात की मेरी तुम ही हो आहट,
तुम खनका दो जो अपने पायल,
तो क्या रखा है मदिरालय में.
नयनों से अपने सींचती हो मेरे जख्मों को,
अब पास आ कर कह दो की मेरे जख्म हैं तुम्हारे,
तुम लहरा दो अप्पना आँचल,
तो, परमित, फिर सावन में क्या रखा है
एक इल्तिज्ज़ा
एक इल्तिज्ज़ा है दिल की,
मेरे पास आइये,
कुछ दुरी भी रहे ,
कुछ शर्म भी रहे,
मैं अपनी साँसों को न रोक सकूँ,
आप अपनी बोझल पलकों से न कह सकें।
एक इल्तिज्ज़ा है दिल की,
की अपन जुल्फों में बांध लीजिये,
मैं बादल बनके न अम्बर पे उड़ सकूँ,
आप तितली बनके न खो सकेन.
एक इल्तिज्ज़ा है दिल की,
दो बूंद अपने प्याले से छलका दीजिये,
मैं अपनी प्यास न मिटा सकूं, परमित
आप न फिर मुझे पिला सकें।
काली लटें
काली लटों से ना यूँ खेला करों,
पास आये हो तो थोड़ा कह भी जाया करो.
मिलते हैं रोजाना इनसे खेलने वाले,
पहलु में आये हो तो सो भी जाया करो.
काली लटों से ना यूँ खेला करों,
पास आये हो तो थोड़ा कह भी जाया करो.
बसे हैं कितने यहाँ मुझे छूने वाले,
तुम तो दिल को मेरे बसा जाया करो.
जिस्म मेरा गोरा पर दिल अंधेरो में है,
चहकते हो इतना कभी धडकनों को मेरे चहकाया करो.
मेरा क्या है परमित, एक दिन तुझे मिटा दूंगी,
उसके पहले ही ईद-दीपावली मनाया करो.