अजब – अजब सा प्यार हैं


अजब – अजब सी दास्तानें,
अजब – अजब सा प्यार हैं.
धोखा देते हैं सच्चे को,
और झूठे पे, जान निसार है.
अजब – अजब सी दास्तानें,
अजब – अजब सा प्यार हैं.
कोई कहता शादी,
कागज़ का एक टुकड़ा है.
किसी को मौत तक,
इस लाल जोड़े का इंतजार है.
अजब – अजब सी दास्तानें,
अजब – अजब सा प्यार हैं.
दिल और नज़रों के इस खेल में,
बस अब जिस्मों का व्यापार है.
अजब – अजब सी दास्तानें,
अजब – अजब सा प्यार हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

धरुंगा तुम्हे मैं प्रिये


जिस दिन धरा पे,
धरुंगा तुम्हे मैं प्रिये,
नभ तक हलचल होगी हाँ.
तारों-सितारों की महफ़िलों का क्या?
कलियाँ भी खिल कर चूमेंगी तुम्हे हाँ.
एक दिन उठूंगा,
मैं दलित-कुचलित,
उठाऊंगा तुम्हे अपनी बाहों में,
चुमुंगा, झुमके इसी महफ़िल में हाँ.
जो हँसते हैं वो हंस ले,
हंसा लें खुद को,
मुझे यकीन हैं,
की एक दिन वो दिन आएगा हाँ.

 

Parmit Singh Dhurandhar

He is our hero: Marlon Samuels


The man who always rocks,
At the time, we need,
And, in the finals.
He is not Gayle,
He is neither Virat,
Nor devilliers.
He is our hero,
Marlon Samuels.
In 2012, and now in 2016,
West Indies won the cup,
With his fifties.
He is not Gayle,
He is neither Bravo nor Russels.
He is our hero,
Marlon Samuels.

 

Parmit Singh Dhurandhar

दोनों की जवानी ही ऐसी है


वो बड़ी मशहूर हैं,
मैं बड़ा मगरूर हूँ.
दोनों की जवानी ही ऐसी है,
की नजरें एक – दूसरे पे,
बस जिस्म-जिस्म दूर-दूर है.
जो हसतें हैं Crassa पे,
वो क्या जाने?
हम रातो को कितना मसरूफ हैं.
वो हो गई किसी की,
मगर उनकी पतली कमर पे,
ये दिल आज भी मजबूर है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

बलखना किसे कहते हैं ?


बेहयाई का ऐसा है दौर दोस्तों,
दिल में कोई और, जिस्म पे कोई और दोस्तों।
हमसे पूछो बलखना किसे कहते हैं ?
जो कल तक मेरी थी, अब किसी और की दोस्तों।

 

परमीत सिंह धुरंधर

अपना सब उतार गईं


दास्ताने-मोहब्बत क्या कहें,
वो सूरते-बाज़ार में बिक गईं.
कुछ ऐसे जिस्म की चाहत थी,
की वो सैकड़ों की बाहों में झूल गईं.
हुस्न के इसी रंग पे,
ख्वाब बिकते हैं.
उनकी साड़ी, काजल पे हमने लुटाएं पैसे,
और वो किसी के पैसों पे,
साड़ी, काजल, अपना सब उतार गईं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

तो प्रतिकार करना होगा


ये कैसी जिंदगी है, जो दर्द से भरी हैं.
आँखों में काजल है, वो भी आंसू से भींगी हैं।
ओठों पे है लाली, कानो में है बाली,
खनकती है पायल, पर अपने ही आँगन में नौकर बनी है.
थामा था जिसने हाथ, लेके फेरे हाँ सात,
पर एक रात के बाद ही, उसके बिस्तर पे लाश सी पड़ी है.
जिसकी हाँ कमर पे, कितने मर मिटे,
जिसकी एक झलक पे, कितने दीवाने थे मचले,
आज उसी के अंगों पे, खून की नदी है.
तो प्रतिकार करना होगा, ऐसे इंसानो का,
जिनकी नजर में, औरत सिर्फ एक बेबसी है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

रिश्तेदार मुझसे, मेरे नाराज हो गए हैं


रिश्तेदार मुझसे, मेरे नाराज हो गए हैं,
जब से हम अपनी दुल्हन के संग हो गए हैं.
मौलवी-पंडित, सब परेशान हो गए हैं.
जब से हम अपनी बीबी संग खुलेआम हो गए हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

प्यार और परवाह


बचपन में बहन, माँ से ज्यादा,
जवानी में माँ, महबूबा से ज्यादा,
और बुढ़ापे में बीबी, बच्चों से ज्यादा,
प्यार, और परवाह करती है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

हमने कबूतरों को छोड़ दिया है


हमने कबूतरों को छोड़ दिया है,
उड़ाना अब छज्जे से.
डोली उनकी उठ गयी,
अब क्या रखा है मोहल्ले में?
मेरा सारा प्रेम-रस ले कर,
वो सींच रही बाग़ किसी का.
हुस्न का ये रंग देख कर,
उचट गया है मन जीने से.

 

परमीत सिंह धुरंधर