ख्वाब


सैकड़ों हैं संसार में,
जो तुमपे निसार हो जाएँ।
हम तो बस आपका,
दीदारे-ख्वाब रखते हैं.
आपकी खूबसूरती का ऐसा,
आयाम है.
की हर रात पलकों में,
तुम्हारा ख्वाब रखते हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

हुस्न


खूबसूरत जाल फैलाने पर,
फंसता हर मर्द है.
मगर चाँद सिक्के उछल कर देखो,
फिर हुस्न कैसे बदलता रंग है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

Life


There is two ways to live the life. One, where you get all success, awards, recognitions, crowd behind you. The other way is to live like Prof. V. Sitaramam, Pune University, where there is only loneliness. And long back, I have chosen the second way.

 

Parmit Singh Dhurandhar

प्रेम -मदिरा


प्रेम अदृश्य होता है,
पर, दृश्यों को बदल देता है.
जिन्हे नहीं पता,
पेड़ – पौधों की प्रजातियां।
फूल – पत्तियों को किताबों में,
वो भी संजोते हैं.
मदिरा दृश्य है,
पर, सबको अदृश्य कर देता है.
जिन्हे नहीं पता,
अक्षरों का, उनके मूल्यों का.
वो भी, मंदिरों में, समाज में,
मेले में, अमूल्य प्रवचन देते हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

वो इतने करीब से निकल गई


वो इतने करीब से निकल गई,
अंजान बनके।
मोहब्बत थी, बरना चुनर उड़ा लेते,
हैवान बनके।
अब इशारों -इशारों में रह गई जिंदगी,
सुखी, उदास, गुलाब की पंखुड़ियों सी,
किताबों में बंध के.

 

परमीत सिंह धुरंधर

तुम करवट भी लोगी


तुम्हे इतने प्यार से रखूँगा समेट के,
की तुम करवट भी लोगी तो, मेरे बाहों में.
मेरी ओठों से तुम्हारी ओठों का न होगा फासला,
तुम साँसे भी लोगों तो मेरी साँसों से.

 

परमीत सिंह धुरंधर

काले हम हो गए


जमाना आज भी कहता है,
की वो खूबसूरत बहुत हैं.
किसी को क्या पता?
उनके काजल से काले,
हम हो गए.

 

परमीत सिंह धुरंधर

दिया वो ही बुझाते हैं


दिया वो ही बुझाते हैं,
जो शर्म का ढिढोंरा पीटते हैं.
जहाँ जमाना चुप हो जाता है,
हम वहाँ अपनी आवाज उठाते हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

जवानी उनपे चढ़ी


अर्ज किया है दोस्तों,
की जवानी उनपे चढ़ी,
और बर्बाद हम हो गए.
लुटा हमें उसने जी भरकर,
और जमाने भरके,
गुनाहगार हम हो गए.

 

परमीत सिंह धुरंधर

आपन गावं के चिड़िया रहनी


अइसन -वइसन खेल ए राजा,
मत खेल आ तू हमारा से.
आपन गावं के चिड़िया रहनी,
लुटले रहनी कतना खेत बाजरा के.
जाल बिछा के कतना शिकारी,
रहलन हमरा आसरा में.
अइसन घुड़की मरनी,
हाथ मल आ तारन आज तक पांजरा में.
अइसन -वइसन चाल ए राजा,
मत चल आ तू हमारा से.
आपन गावं के खिलाड़ी रहनी,
कतना के पटकनी दियारा में.
ढुका लगा के बइठल रहलन,
कतना चोर चेउंरा में.
अइसन दावं मरनी,
आज तक दर्द उठेला उनकर जियरा में.

 

परमीत सिंह धुरंधर