धरा पे चोट पड़े,
तो हरियाली छाती है.
सागर जो बाँध तोड़े,
तो बर्बादी छाती है.
कलियाँ विकसित हो तो,
काँटों का भय मिटा जाती हैं.
काले बादलों की बूंदें,
तन – मन का मैल मिटा जाती हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
धरा पे चोट पड़े,
तो हरियाली छाती है.
सागर जो बाँध तोड़े,
तो बर्बादी छाती है.
कलियाँ विकसित हो तो,
काँटों का भय मिटा जाती हैं.
काले बादलों की बूंदें,
तन – मन का मैल मिटा जाती हैं.
परमीत सिंह धुरंधर