प्रेम और प्रजनन


क्या होता अगर वो मिल जाती?
दो बच्चे हो जाते,
दोस्तों में मेरे थोड़े किस्से हो जाते।
और क्या होता?
चलो दो ना सही,
चार हो जाते।
उसके आगे क्या होता?

खाने को दाल – रोटी मिलती,
सब्जी थोड़ी स्वादिस्ट बनती।
पर उसके आगे क्या?
बिस्तर पे चादर थोड़ी सुगन्धित होती,
मेरी कमीज – पेंट थोड़े सलीके के,
और दाढ़ी सफाचट होती,
पर उसके आगे क्या होता?

ससुराल वाले थोड़ा मान – दान देते,
साली थोड़ी घरवाली होती,
पर उसके आगे क्या?
कुछ दिनों बाद जब सब फीका होता,
तो उसके आगे क्या?

ध्येय अगर ना प्रजनन हो,
तो प्रेम का कोई अस्तित्व नहीं।
अंगों से अंग टकराना,
इसमें तो कोई विजय नहीं।
पौरस, जवानी, यौवन, जो कह लो
अगर इनकी मजिल सिर्फ नारी है,
तो उसके आगे क्या?

 

परमीत सिंह धुरंधर

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