मोहब्बत का समंदर


मेरी मोहब्बत का समंदर
बस पिता के नाम से आरम्भ
और पिता के नाम पे
जिसका अंत होता है.
जैसे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में
अनंत तक शिव, शिव
और बस शिव का नाम होता है.

परमीत सिंह धुरंधर

2 thoughts on “मोहब्बत का समंदर

Leave a comment