वो तस्वीर ढूंढ कर देखिये


किस्मत का दौर देखिये
ख़्वाबों में दर्द देखिये
अगर आपने नहीं देखि है जिंदगी
तो कभी आकर मेरे घर देखिये।

हम दीवारों पे दर्पण नहीं रखते
हम अब उसमे अपना चेहरा नहीं देखतें
जुल्फों से घने इन अंधेरें में
कभी टहल कर देखिये।
अगर आपने नहीं देखि है जिंदगी
तो कभी आकर मेरे घर देखिये।

इजाजत ही नहीं देता है ये दिल
की ये हाथ किसी दिए को जलाये
ठोकरों के बीच से यूँ आप भी कभी
राहें बना कर देखिये।
अगर आपने नहीं देखि है जिंदगी
तो कभी आकर मेरे घर देखिये।

जब कभी ऐसे ही गुजर जाती हैं राते
खुली आँखों के सहारे
तो मेरी खिड़कियों पे, उषा की लाली
और गोरैयों का कलरव देखिये।
अगर आपने नहीं देखि है जिंदगी
तो कभी आकर मेरे घर देखिये।

कहीं मकड़ियों के जालें
कहीं बिखरें किताबों के पन्ने
इस तिलिश्म में कभी उनकी
वो तस्वीर ढूंढ कर देखिये।

परमीत सिंह धुरंधर 

मासिक -माहवारी


हम ही खगचर, हम ही नभचर
हमसे ही धरती और गगन
हम है भारत की संतान, मगर
भारत को ही नहीं है खबर हमारी।
पल -पल में प्रलय को रोका है, और
पल- पल ही है प्रलय सा हमपे भारी।

बाँध – बाँध के तन को अपने
काट – काट के पत्थर – पाषाण को
सौंदर्य दिया है जिस रूप को
उसके ही आँगन से निकाले गए,
जैसे मासिक -माहवारी।
पल -पल में प्रलय को रोका है, और
पल- पल ही है प्रलय सा हमपे भारी।

समझा जिनको बंधू – सखा
उन्होंने ना सिर्फ मुख मोड़ा
हथिया गए धीरे – धीरे, मेरी किस्मत,
तिजोरी, और रोटी।
पल -पल में प्रलय को रोका है, और
पल- पल ही है प्रलय सा हमपे भारी।

सत्ता भी मौन खड़ी है, भीष्म – द्रोण, कर्ण सा
निर्वस्त्र करने को हमारी पत्नी, बहू और बेटी
रह गया है बाकी
अब केवल कुरुक्षेत्र की तैयारी।
पल -पल में प्रलय को रोका है, और
पल- पल ही है प्रलय सा हमपे भारी।

परमीत सिंह धुरंधर 

मेरा इश्क़ जवान है


मुझे नहीं पता मेरे ईमान का रंग क्या है
पर मेरी आन, बाण और शान बिहार है.
उन्हें हुश्न का चाहे जितना गुमान हो
पर इस उम्र में भी मेरा इश्क़ जवान है.

परमीत सिंह धुरंधर 

हमर सैया जी


बकरिया चरावे गइलन हमर सैया जी
बकरिया के पीछे हमें भूल गइलन जी.
कोई जाके ढूंढे कहाँ गइलन जी?
भरल जवानी में हमें छोड़ गइलन जी.

परमीत सिंह धुरंधर 

मोहब्बत


ए दोस्त मोहब्बत में ये ख्वाब हमारा है
तू चाँद बने उस अम्बर का, जिसपे मेरा सितारा है.

परमीत सिंह धुरंधर

बेताब हैं बनने को दादी


चंद – मुलाकातों में दिल भर गया सनम का
अब गैरों के दिल को बहलाया जाएगा।

शौक ऐसे चढ़ा है दिल पे उनके लबों का
ए साकी जाम ये हलक से उतर न पायेगा।

इन 18 सालों में वो बेताब हैं बनने को दादी,
मेरी इस बेताबी को अब नहीं मिटाया जाएगा।

ऐसे रौशन कर रही हैं वो अपने घर को
मेरे आँगन से अन्धेरा मिट न पायेगा।

और क्या होगी सितम की रात इससे बढ़कर?
मेरा दिया, मेरे घर को ही जला जाएगा।

ना पूछों दर्दे-दिल की दवा हमसे
तुमसे ऐसा दर्द न उठाया जाएगा।

परमीत सिंह धुरंधर

अब अश्कों में बहाया जाएगा


रंगे-हालात बदलते -बदलते, कुछ यूँ बदल गयी जिंदगी
जिन्हे छुपाते थे किताबों में, उन्हें अब अश्कों में बहाया जाएगा।
हमसे मत पूछो, खंजर था या गोली थी
अब तो इस मौत के बाद भी उसे नहीं भुलाया जाएगा।

परमीत सिंह धुरंधर 

तोता ठोर मारsता-2


चूड़ी संभालीं की पायल संभाली
चोली – चुनर में हलचल उठsता।
कहिया ले जोगाइन धन राजा के हम?
पडोसी रतिया के छप्पर लाँघsता।
कौगो चिठ्ठी आ पाती पठइनि
सुनी ए राजा, मन अब बाँध तुरsता।
का कहीं सखी, अब आपन परेशानी
जोबना भी अब गोद में किलकार मांगsता।

परमीत सिंह धुरंधर

To fly in the same airplane


Hot, hot
Sweet, sweet
somthing like that
I need, need
You are just like that
I have been dreaming
So lets try again
To enjoy the heavy rain
To feel we are together
And made for each other.

I have almost finished
The journey of the life
It is painful to see
That you just arrived
lets try again
To fly in the same airplane
To enjoy the vacation
And feel for each other.

Parmit singh Dhurandhar

प्रेम


प्रेम जितना मधुर होगा
प्रेम उतना ही सहज होगा.

प्रेम जितना सहज होगा
प्रेम उतना ही निकट होगा।

प्रेम जितना ही निकट होगा
ह्रदय उतना ही जवाँ होगा।

हृदय जितना ही जवाँ होगा
रूप उतना ही पुलकित होगा।

रूप जितना ही पुलकित होगा
सहचर्य उतना ही मधुर होगा।

परमीत सिंह धुरंधर