तोता ठोर मारsता


जवनिया हिलोर मारsता
तोता, तोता ठोर मारsता।
पियवा, अनाड़ी, परदेस में बईठलबा
पाकल अमरूदिया, चोर तुरsता।
ए सखी, का कही अब आपण परेशानी
रतिया में, खटिया पर खटमल चढ़sता।

परमीत सिंह धुरंधर


वो सैया जी रउरा से देहिया लगा के
ना रहनी घर के, ना रहनी घाट के.
माई-भौजाई रखतारी २४ घंटे अब आँख
अंगना-दुवारा होता बस हमरे बात
की अबकी होली के बाद, हो जाइ पीला हमर हाथ.
वो सैया जी रउरा से अंगिया लगा के
ना रहनी घर के, ना रहनी घाट के.

परमीत सिंह धुरंधर 

इश्क़ के दास्ताँ


ए समंदर, मुझसे इश्क़ के दास्ताँ ना पूछ
हम राजपूतों की शान है, हम लुटा देतें है अपना सब कुछ.
वो दरिया हैं, बंध जाना नहीं है उन्हें कुबूल
और मैं बंध जाऊं, ऐसा नहीं मेरी नशों का खून.

O sea, do not ask me stories of love
We are Rajput, we are known to sacrifice everything we own for our love.
They are like streams, they don’t have to be tied
And I accept to be tied, that is not possible due to my lineage.

परमीत सिंह धुरंधर 

जवानी


जवानी वो आग है
जिसमे सोना, पीतल, कोयला
सब लाल है.

परमीत सिंह धुरंधर 

ठरकी


मेरा शौक ना कर, Crassa तू यूँ
मेरी बाली है उमर, तू ठरकी बहुत है.
अभी तो चढ़ ही रही है मुझपे जवानी
तेरी साँसें हैं कम, मेरी रातें बहुत हैं.

Do not think of me, you Crassa
I am tender and you are full of wrong intentions
I am still too young and pure for your
You have only now desire left in your body, whereas i am full of dreams.

परमीत सिंह धुरंधर 

जिंदगी


जिंदगी को मेरे जब भी तौला जाएगा
ए जमाना, असफल इसे लिखा जाएगा.
मगर चुनौतियों का जब तकाजा होगा
इतिहास में मुझ सा न कोई दूजा होगा।

Whenever my life will be analysed
It will be considered unsuccessfull.
But when the challenges of life also become paet of the ablysis.
There will be noone like me in history.

परमीत सिंह धुरंधर 


इश्क़ में लड़कियाँ नहीं रोती
जो गुजर गयी जिंदगी, वो लौट के नहीं आती.

Girls don’t cry in love
The life that has passed does not come back.

परमीत सिंह धुरंधर 

लहरें


समंदर नहीं संभाल सका, वो लहरें तुम्हारी क्या होंगी?
तुम्हे छू कर, तोड़ कर, वो मुड़ जाएंगी।

The sea could not handle even if they originated from the sea. How can you expect anything then?
These waves will return after finishing their jobs or after breaking you.

परमीत सिंह धुरंधर 


वो बदल लेती हैं काजल, हर रात अपनी आँखों का
नए सफर की शुरुआत, पुरानी यादों से नहीं होती।

She changes collyrium of her eyes every night
A new journey does not begin with old memories.

परमीत सिंह धुरंधर 

पहाड़


ए पहाड़
तुझे कोई मिटाना चाहता है
की तू ब्रह्मिणवाद की पहचान है.
तुझे कोई अपना कहता है
तुझे बचाना चाहता है
की तू उनके अपने जंगल का है.
फिर कौन है तू?

वो बाते करते हैं तेरी
पर तेरे अस्तित्व की नहीं।
जो तुझे जंगल का कहते हैं
उन्हें ना जंगल की चिंता है, ना तेरी
उनको डर हैं अपने पहचान की
अपने पिछड़ जाने की इस दौड़ में।
जो तुझे ब्राह्मणों का कहते हैं
उन्हें तुझसे तो कोई भय नहीं
तू जड़ है, स्थिर है, मूक है, अहिंषक है
फिर ये तेरा ऐसा, भीषण विरोध कैसा?

परमीत सिंह धुरंधर