धुप में ना निकलो, यूँ हजार रंग ले कर
तड़पती है दुनिया दोपहर में जल-जल कर.
सबकी निगाहें प्यास में डूबीं हैं
उसपे ऐसे न तडपावों तुन यूँ घूँघट में छुप-छुप कर.
मन है व्याकुल, जाए तो जाए किधर
भटकावों ना तुम हमें यूँ राहें बदल-बदल कर.
परमीत सिंह धुरंधर
धुप में ना निकलो, यूँ हजार रंग ले कर
तड़पती है दुनिया दोपहर में जल-जल कर.
सबकी निगाहें प्यास में डूबीं हैं
उसपे ऐसे न तडपावों तुन यूँ घूँघट में छुप-छुप कर.
मन है व्याकुल, जाए तो जाए किधर
भटकावों ना तुम हमें यूँ राहें बदल-बदल कर.
परमीत सिंह धुरंधर
सैयां काट -काट के खाये गाल रे
जैसे मालपुआ ह इ बंगाल के.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।
ऐसे तो दांत न थे किसी यार के
सखी, एहीसे मीठा लागे भतार रे.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।
कभी भाई- कभी बेटा, कभी बीबी – कभी पतोह
बुढ़ापे में मुलायम की सब लगते हैं क्लास रे.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।
दिल्ली में ताल थोक के मनोज तिवारी है तैयार
अबकी बार, दिल्ली में बिहार -२.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।
कमलनाथ के हाथ में जैकलीन की कमर
युवा राहुल बाबा पे कोई ना डाले नजर.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।
बॉलीवुड में है एक मैना, बोले खरी – खरी बात
नाम है कंगना, हारे जिससे रितिक, कारन – सैफ अली खान.
जोगीरा सारा रारा -जोगीरा सारा रारा।
परमीत सिंह धुरंधर
पतली कमर पे
आग लगा दूँ, हाहाकार मचा दू रानी।
काट ले जवानी, आके खलियानी।
झुमका दिला दूँ, नथुनी दिला दूँ
तू चल मलमलिया मेरी रानी।
काट ले जवानी, आके खलियानी।
छपरा दिखा दूँ, पटना घुमा दूँ
तू रिक्शे पे संग बैठ तो मेरी रानी।
काट ले जवानी, आके खलियानी।
परमीत सिंह धुरंधर
तेरे दो नैना गोरी, चाँद को ललचाये रे
कैसे थामें दिल धुरंधर, जब कमर तेरी बलखाये रे?
छोड़ दूँ छपरा, छोड़ दू कचहरी
डाल दूँ खटिया आँगन में
जो तू जुल्फों में सुलाए रे.
डाल के कजरा, छनका के पायल
जवानी के आग में, तू छपरा को झुलसाए रे.
लहरा – लहरा के तेरा आँचल, बादल को पागल बनाये रे.
छोड़ दूँ छपरा, छोड़ दू कचहरी
डाल दूँ खटिया आँगन में
जो तू जुल्फों में सुलाए रे.
परमीत सिंह धुरंधर
रात का नशा है तनहा – तनहा
किसे पुकारें, दर्द है ये पुराना सा?
खाकर लाख ठोकरें भी
दिल मेरा है अब भी सीधा सा.
परमीत सिंह धुरंधर
.
ये मिटटी मेरी है, ये अम्बर मेरा है
मगर मैं तनहा हूँ इस गले गुलिस्ता में.
ये दरिया मेरी है, ये सागर मेरा है
मगर मैं प्यासा हूँ इस गले -गुलिस्ता में.
जिसको भी चाहा, वो ही हमसे रूठा
किस – किस को मनाएं इस गले -गुलिस्ता में?
निगाहें है कातिल, अदायें हैं शातिर
कब तक बचाएं दामन इसे गले -गुलिस्ता में?
परमीत सिंह धुरंधर
भोजपुरी भाषा की प्रबलता का प्रमाण ये है की इसमें आप किसी का
नाम भतार सिंह, लताड़ सिंह, नवजात सिंह और खलिहान सिंह रख सकते हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
खुले दिल से
अरमानों को सजाया था
कुछ टूट गए, कुछ सूख गए
मैंने दिल ही कुछ ऐसे लगाया था.
हम तन्हा रह गए
कोई शिकवा नहीं
अंततः उन्हें कोई भाया था
जिसके संग
उन्होंने परिणय-पत्र छपवाया था.
परमीत सिंह धुरंधर
कहवाँ के अगिया सैया कहवाँ बुझावातारS
तरसे जोबवान हमार, सौतन के भिंगवातारS
ललुआ – भलुआ जागल बारन सन इंतजार में
तू सौतन के सैंटा बन के मेर्री क्रिसमस गावातारS।
परमीत सिंह धुरंधर
क्या रखा है बेकार का डराने में?
कभी आ के देखो हरियाणा में.
यहाँ से अगर निकल गए
तो आँख गराना छपरा पे.
यहाँ की लाठी तोड़ दे
वहाँ की लाठी फाड़ दे
फिर भी अगर बच गए
तो मिठाई चढ़ाना मथुरा में.
परमीत सिंह धुरंधर