चाल


हर धार को
किनारों से मिलना है।
मिलकर किनारों से
मिटना है।

प्रकृति की यही
एक चाल है।
इसी चाल में फँसकर
सबको पीसना है।

हमको दिल वहीं रमाना है,
जहाँ प्रभु का साया है।

RSD

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