Make him lit


You have the body
You have the legs
Shake it slowly
Take all the glaze.
The night is all yours
Don’t let him go
Just don’t don’t
Don’t let him go.

You have the booty
You have the shape
Shake it slowly
Take all the glaze.
The night is all yours
Don’t let him go
Just don’t don’t
Don’t let him go.

You have the eyes
You have the age
Make it straight
Take all the glaze.
The night is all yours
Don’t let him go
Just don’t don’t
Don’t let him go.

You have the desire
You have the spark
Make him lit
Take all the glaze.
The night is all yours
Don’t let him go
Just don’t don’t
Don’t let him go.

 

Parmit Singh Dhurandhar

Now you are eighteen


Do not be shy,
Now you are eighteen.
Just taste it,
Before you loose everything.
All eyes are on you baby,
Each heart is behind you.
Just grab it,
Before you loose everything.
Do not be shy,
Now you are eighteen.

Take the drink and come on the floor,
Be a queen and let the music go.
Shake it baby,
Before you loose everything.
Forget all your dreams and career,
If you know you are a warrior.
Just use it,
Before you loose everything.
Do not be shy,
Now you are eighteen.

 

Parmit Singh Dhurandhar

नशा जीवन का


कहाँ है वो नशा जीवन का?
वो खुशियाँ, वो मस्ती,
वो मज़ा जीवन का.

वो रिश्तेदारों के कहकहे,
वो दादा – दादी की कहानियाँ।
वो नौक – झौंक,
वो रुस्सा – रुसववाल।
वो आँगन में दो चूल्हे,
और एक थालियाँ।

कहाँ है वो नशा जीवन का?
वो खुशियाँ, वो मस्ती,
वो मज़ा जीवन का.

वो खपरैल के घर में,
खुले आँगन में,
गीत गाती लड़कियाँ।
सिलवट पे हल्दी पिसती,
चूल्हे पे खांसती,
वो जाँत और मुसल,
चलाती भाभियाँ।

कहाँ है वो नशा जीवन का?
वो खुशियाँ, वो मस्ती,
वो मज़ा जीवन का.

वो दो पतोह की सास बन चुकी,
ससुराल से मायके आयी,
लड़की को देखने उमड़ी भीड़.
और उस भीड़ में,
बूढ़े हो चले दामाद को,
दबाती, चींटी काटती नारियाँ।

कहाँ है वो नशा जीवन का?
वो खुशियाँ, वो मस्ती,
वो मज़ा जीवन का.

 

परमीत सिंह धुरंधर

एक पगली लड़की के अरमान देखिये : भाग – 2


एक पगली लड़की के अरमान देखिये,
बिना चूड़ी, बिना कंगन के,
बिना पायजेब के उसका श्रृंगार देखिये।

एक टकटकी सी लग जाती है,
जब वो निकलती है.
कच्ची उम्र में ही,
उसके अंगों का मल्हार देखिये।

अधर खुलते नहीं, और वो सब कह जाती है.
अधखुली पलकों से सब का मन मोह जाती है.
नाजुक तन – बदन पे, यौवन का,
प्रबल -प्रखर, प्रवाह देखिये।

एक पगली लड़की के अरमान देखिये,
इस वीराने, उरस जमीन पे एक गुलाब देखिये।

 

परमीत सिंह धुरंधर

तिल


नहीं झीलें हैं, नहीं हैं तलाबें,
जोड़े बैठते हैं अब,
ऊँची – ऊँची मॉल में.
कहाँ जाएँ गुरैया, कहाँ जाएँ परिन्दें?
ना वृक्ष हैं, ना हैं कहीं घोंसले।

अब जवानों की बस्ती है,
और बूढ़ों को मिल गए हैं वृद्धालय।
ना बैलगाड़ी है, ना ताँगें,
अब तो मोबाइल और फेसबुक पे,
पढ़े जाते हैं प्रेम के कसीदें।

अब कहाँ इंतज़ार करना पड़ता है?
दुपट्टा गिरने और घूँघट के उठने का.
अब तो सीधे देख लेते हैं लोग,
तिल वक्षों पे और मुखड़े के उनके।

 

परमीत सिंह धुरंधर

पति को सबसे अच्छा बताती हैं


मत पूछो दरियावों से समंदर का पता,
ये तो सीधी राहों को भी टेढ़ा बना देती हैं.

हुस्न क्या कहेगा, की वफ़ा क्या है?
ये तो तीस के बाद शादी, और शादी के बाद,
पति को सबसे अच्छा बताती हैं.

यूँ ही नहीं पाला है कुत्तों का शौक मैंने,
किसी के भी कुत्ते को वो गले लगा लेती हैं.

उनसे क्या पूछते हो दोस्त इश्क़ में कुछ भी?
वो तो,
दौलत के लिए किसी को भी शौहर बना लेती हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर