खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार


खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।
पाप का नाश हो, भोले, बढ़े पुण्य अपार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।
खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।

तप रहे तपस्वी, भोले, जल रहा है संसार,
सृष्टि पर, भोले, बढ़ रहा है भार।
झूमकर, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
अब तो सुन लो, भोले, भगीरथ की गुहार।
खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।

हलाहल को बाँधकर, भोले, नीलकंठ बन जाते हो,
डमरू पर अपने जब चाहो, प्रलय को नचाते हो।
फिर ऐसा क्या है, भोले, जो नहीं सुन रहे पुकार?
खोलकर जटा, भोले, ढक दो अब आकाश।
खोलकर जटा, भोले, छोड़ दो गंगा की धार,
माँ गंगे की गोद में हो, भोले, जीवन का उद्धार।

RSD

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