वक्त और इंसानियत


वक्त ने सभी को वो राह दे दी है,
जहाँ हम न बदले, तो फिर कोई राह न होगी।
इंसान वही है, जो इंसान का रहे,
ये बात न रही, तो दिल से कोई बात न होगी।

नफ़रत की हवाओं में क्या रखा है आखिर,
मोहब्बत न रही तो कोई सौगात न होगी।
चेहरों पे मुस्कानों का मेला तो लगेगा,
पर सच्चे दिलों की कहीं जमात न होगी।

जो दर्द में भी औरों का सहारा बन जाए,
ऐसे इंसानों से फिर मुलाकात न होगी।
रिश्ते अगर मतलब से ही जिए जाएंगे,
तो फिर दिलों में कभी-कोई चाह न होगी।

चलो आज फिर इंसानियत को जगा लें,
की बेटियों की खौफ में रात न होगी।
वक्त ने सभी को वो राह दे दी है,
जहाँ हम न बदले, तो फिर कोई राह न होगी।

Dedicated in memory of the Bhopal Katara Hills incident.

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