Dream and Plot


To have a dream
You have to be innocent.
Because a mind full of plans
Only makes plots
And never chase a dream.

To win a marathon
You need to compete with yourself.
To compete with someone
You need to make a plan and plot.
But to compete with yourself
You have to chase a dream.

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I am not alone 

I am just with my soul. 

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माँ की निगाहों में है


फ़िज़ाओं में रौशनी सितारों से नहीं, दुआओं से है
मेरी राहें-मंजिल मेरी माँ की निगाहों में है.

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जख्म


दरिया और समंदर में, समंदर गहरा है
तेरे हिज़्र का जख्म, हर जख्म से गहरा है.
जझुकि तेरी नजर, तेरे शर्म का पर्दा है
पर इनसे चलें तीरों का जख्म बहुत गहरा है.

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मुसाफिर हैं जो तन्हाई के उनका शौक भी तन्हाई है
जो छू के बैठें हैं तुझे, उनकी चाह में नहीं अब कोई अंगराई है.

जिस्म की ख्वाइसे दिल की ख्वाइशों से जुदा है क्या
ये जिसे तुम कह रहे हो मोहब्बत, वासना से जुदा ही क्या?

मेरी जिंदगी ही क्या जिसमे तेरा कोई जिक्र नहीं
वसल न सही, ना सही, तुझसे कोई हिज्र नहीं।

वो आँखों से इज़ाज़त लेने का दौर कहाँ
जब हम निगाहों से रोटी बदल लेते थे
वो मोहब्बत का दौर कहाँ
जहाँ बिना वसल के रात गुज्जार लेते थे.

ना पूछ की कैसे गुजरी है रात
ये पूछ की कैसे गुजारी है रात.
वो जो कहते थे हंस -हंस के हर बात
अब बिना कहे काट लेते हैं कई-कई रात.

साकी तेरा मुस्कराना गेम इलाज़ है मेरा
ये बस शराब नहीं दवा- ए -फ़िराक है मेरा।

सुकून मिला न मुझको शबे-वसल के बाद
कुछ ऐसे टूटा हूँ मैं तुम्हारे हिज़्र के बाद.

मोहब्बत में ताक्काबुर उनका अंदाज है
इश्क़ की मानिल कुछ नहीं बस गेम-फ़िराक़ है.

मंजिल तक आते -आते हर कारवां छूट गया
हर किसी के नसीब में कहाँ ये मुकाम है.

साकी पिला कुछ ऐसे की मयकदा घर बन जाए
वसल तो मुमकिन नहीं जख़्म भर जाए
कई रातों से आँखों को नींद मय्यसर नहीं
तू बस मुस्करा दे की कोई ख्वाब मिल जाए.

खुदा जानता है काफिर वो नहीं जिसने छोड़ दी इबादत तेरे हिज़्र के बाद
काफिर वो है जो मांगता है जन्नत और उसकी ७२ हूरें तुझसे वसल के बाद.

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तन्हाई


हिज्र में तुम्हारे रहा न मुझ सा कोई
जो वो समझे मेरी ये तन्हाई।

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मोहब्बत मेरी एक इबादात है


एक तू ही नहीं है और भी हैं यहाँ
इनके लिए सज-संवर के है धरा.
दिल तोड़ो ना कभी किसी का
हर दिल में बैठा है खुदा यहाँ।
मोहब्बत मेरी एक इबादात है
ना मानते हैं वो, ना ही माने खुदा।

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राहगीर


उनकी जुल्फ के कई हैं राहगीर यहाँ
पर कोई बसा न पाया अपनी जागीर यहाँ।
ग़ालिब-से-मीर तक, सबकी रही एक ही तकदीर यहाँ
कोई बंधा जंजीर से, कोई बनके रहा बजीर यहाँ।
वो तो सेज से, सेज पे ही रही यहाँ
मैं बैठा रहा ताउम्र लिए एक तस्वीर यहाँ।

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चूड़ियाँ


मैंने उन आँखों में बस शर्म को ही देखा
खेलता उस शर्म से कोई और है.
खरीदता ही रह गया मैं चूड़ियाँ
पहनाता उसे और तोड़ता कोई और हैं.
और कैसे मांगू रब बता, जिसे मांगता हूँ तुझसे
तेरे ही दर पे उसे अपनाता कोई और है.

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जवानी


आग लगा दो पर्वत में अगर छाई तुमपे जवानी है
ना मिली उनकी जुल्फ तो क्या, अपनी भी एक कहानी है.
टुटो, टुटो तुम बार बार ऐसे, की चोट हर बार तुम्ही पे हो
अधरों पे वो प्यास बसा लो, जहाँ हर दरिया सूख जानी है.

The image was taken from google search from the link https://www.mcgill.ca/newsroom/channels/news/mountain-fires-burning-higher-unprecedented-rates-331540

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