शहर समझता है नादान हमें
शहर को क्या पता?
रोशन है ये शहर हमसे।
सांझ ढले वो आ जाती है छत पे
बदनाम हम हैं, मगर वो भी कब से
हैं अपनी शराफत छोड़ चुके।
परमीत सिंह धुरंधर
शहर समझता है नादान हमें
शहर को क्या पता?
रोशन है ये शहर हमसे।
सांझ ढले वो आ जाती है छत पे
बदनाम हम हैं, मगर वो भी कब से
हैं अपनी शराफत छोड़ चुके।
परमीत सिंह धुरंधर
इश्क़ मेरा समंदर सा था
मगर वो नहीं मानी।
क्यों की शक्लो-सूरत से
मैं बंदर सा था.
परमीत सिंह धुरंधर
दुनिया छोटी पर गयी अब तो
मेरी प्यास इतनी बढ़ गयी
अरे जब से तुझपे नजर मेरी पड़ गयी.
सब इतने दीवाने हैं महफ़िल में तेरे रूप पे
कितनो की बीबी उनको
तीन – तलाक पढ़ गयी.
परमीत सिंह धुरंधर
हुश्न है एक, हजारों अदाएं
फिर कैसे ना Crassa मात खाए?
कभी वक्षों पे जुल्फें,
कभी नितम्बों पे नागिन लहराए।
फिर कैसे ना Crassa मात खाए?
कभी नैनों से मदिरा छलके
कभी मृग सी मन बहकाए।
फिर कैसे ना Crassa मात खाए.
परमीत सिंह धुरंधर
तेरे गोरे – गोरे अंगों पे ये काले – काले नयन
ना जीने देते हैं, ना सोने देते हैं
ये मन को मेरे तूने कैसा दे दिया बंधन?
तेरे गोरे – गोरे वक्षों पे ये तीखे – तीखे नयन
ना पीने देते हैं, ना मरने देते हैं
ये जीवन को मेरे कैसा मिला बंधन?
परमीत सिंह धुरंधर
मेहनत से ही मिलता है खुदा
ये ही कह गए है ईसा.
राम भी उसी के हैं
जो करता है परमार्थ यहाँ।
परमीत सिंह धुरंधर
ए गोरी तेरे अंग – अंग पे, खुदा ने कुदरत बरसाई रे
काली – काली आँखे तेरी, बनाये मुझे मवाली रे.
जी करता है चुम लूँ तुझको, बनके भौंरा हरजाई रे
कसी – कसी चोली तेरी, बनाये मुझे मवाली रे.
कटती नहीं राते अब, जब से देखि तेरी नाभि की गहराई रे
लहराती – बलखाती कमर तेरी, बनाये मुझे मवाली रे.
नींदें नहीं आती अब तो अकेले अपनी चारपाई पे
गदराई जवानी तेरी, बनाये मुझे मवाली रे.
परमीत सिंह धुरंधर
ना मेरा शहर देख
ना मेरा सफर देख
देखना है तो बस
मेरा कर्म देख.
परमीत सिंह धुरंधर
मुझे रिश्तेदार बनाकर वो खुद गुनाहगार बन गया
अब किस्से चलेंगे उसके मेरे इश्क़ के.
जाने किसके लिए खुदा ने बनाया था उसे
मुझसे नजर मिलकार वो बदनाम हो गया
अब किस्से चलेंगे उसके मेरे इश्क़ के.
परमीत सिंह धुरंधर
You will be my heart baby
You will be my heart.
Nothing can stop me
As I have already parked my car.
Till the 2 AM, I will be with you
Lets just chill and feel the spark.
We can still continue
By walking in the cold breeze
If you want to hold me in your arms.
Parmit Singh Dhurandhar