दर्द है, तो जी लेने दो.
सिसक -सिसक कर ही सही
दो कदम चल लेने दो.
दर्द नहीं रहा तो हम नहीं होंगे।
जब तक जिन्दा हैं
जाम पी लेने दो.
Rifle SIngh Dhurandhar
दर्द है, तो जी लेने दो.
सिसक -सिसक कर ही सही
दो कदम चल लेने दो.
दर्द नहीं रहा तो हम नहीं होंगे।
जब तक जिन्दा हैं
जाम पी लेने दो.
Rifle SIngh Dhurandhar
जब दिल टुटा था तो संभालना मुश्किल था
अब जब संभल गया हूँ, तो फिर टूटना मुश्किल है.
मुझसे मत पूछो, वो कैसी हैं, कहाँ हैं?
बता दो उनको, हम कैसे हैं, कहाँ है?
मैं कोई दुर्योधन-दुशाशन नहीं जो उनका चीरहरण करूँ
ना उनका चरित्र ऐसा, जिसे पतित करने को मैं द्रुत-क्रीड़ा रचूं।
Rifle Singh Dhurandhar
मेरी चिड़िया, चुग ले दाना
छोड़ आसमा, बना ठिकाना।
तेरा है कोई, इस जहाँ में
समझ ले तू भी ये अफ़साना।
प्यासी रातें, तड़पते दिन हैं
संसार यही है, आँगन-चहचहाना।
Rifle Singh Dhurandhar
मोहब्बत इतना भी ना करो
की शिकायतें बढ़ जाए.
दूरियां इतनी भी ना कम हो
की दीवारें उठ जाए.
सभी इंसान हैं यहाँ
सबकी अपनी-अपनी हैं जरूरतें
खिड़कियों से ना झाँका करो
की कब -कहाँ, कोई नंगा दिख जाए.
Rifle Singh Dhurandhar
ना भींगा करों ऐसे बरसात में
तड़प उठता है Crassa ऐसी रात में.
तुमको तो मिल गए हैं साथी कई
रह गया मैं ही अकेला इस राह में.
कैसे सम्भालूं एक बार बता दे मुझे?
ज़िंदा हूँ मैं बस इसी एक आस में.
कैसे उठाऊं ये गम, ए दिल बता?
हर रात निकालता है वही एक चाँद रे.
रह गया एक राजपूत नाकाम हो के
इश्क़ ने ऐसे जलाया आग में.
ऐसे ना लड़ा मुझसे अँखियाँ गोरी
बदनाम हूँ शहर में किसी के नाम से.
Rifle Singh Dhurdhar
ना शहर मेरा, ना राहें मेरी
ए जिंदगी, कैसे सम्भालूं तुझे?
ना चाँद मेरा, ना तारें मेरे
ए जिंदगी, कैसे सजाऊँ तुझे?
पुकारूँ किसे, बताऊं किसे?
जो दर्द हैं दिल में मेरे।
ना बाग़ मेरा, ना बहारें मेरी
ए जिंदगी, कैसे बहलाऊँ तुझे।
भटकना ही है किस्मत मेरी
भटकना ही है मंजिल मेरी।
ना सुबहा मेरी, ना रातें मेरी
ए जिंदगी, कैसे ठहराऊँ तुझे।
सावन में हूँ एक पतझड़ सा मैं
राहों में हूँ सबके एक कंकर सा मैं.
ना साथी कोई, ना साथ कोई,
ए जिंदगी, किसे सुनाऊँ तुझे?
Rifle Singh Dhurandhar
जिंदगी जहाँ पे दर्द बन जाए
वहीँ से शिव का नाम लीजिये।
अगर कोई न हो संग, राह में तुम्हारे
तो कण-कण से फिर प्यार कीजिये।
राम को मिला था बनवास यहीं पे
तो आप भी कंदराओं में निवास कीजिये।
माना की अँधेरा छाया हुआ हैं
तो दीप से द्वार का श्रृंगार कीजिये।
जिंदगी नहीं है अधूरी कभी भी
तो ना अपहरण, ना बलात्कार कीजिये।
माना की किस्मत में अमृत-तारा नहीं
तो फिर शिव सा ही विषपान कीजिये।
Rifle Singh Dhurandhar
अँखियाँ लड़ाके पीया से सखी
निंदिया आवे रोजे भोर में.
सास दे तारी रोजे गारी
पर मीठा लागे उनकर बोल रे.
Rifle Singh Dhurandhar
वो भी क्या दिन थे?
पिता के साथ में
हम थे हाँ लाडले
आँखों के ख्वाब थे.
जो भी माँग लिया
वो ही था मिल जाता
वो थे आसमान
और हम चाँद थे.
भाग्या प्रबल था
और हम भी प्रबल थे
वो कृष्णा थे हमारे
हम प्रखर थे उनके छाँव में.
Rifle Singh Dhurandhar
हर – हर, हर -हर, शिवशंकर
महादेव, बम – बम.
कैलास से उतरो, की अनाथ से हैं हम.
भटक रहें हैं दर -दर
आ गए प्राणों पे भी लाले
तुम्ही बताओ पिता, अब किसको पुकारे हम?
भागीरथ को भय नहीं
हाँ, अपनी हार का
पर कब तक उठाएंगे हम माथे पे ये कलंक?
पीड़ा मेरी अब तो
पहाड़ सी हो गयी
अब तो खोल दो प्रभु अपने ये नयन.
Rifle Singh Dhurandhar