रोम – रोम से गजानन हम आपका गुणगान कर रहे


प्रभु आप जब से जीवन को साकार कर रहे,
रोम – रोम से गजानन हम आपका गुणगान कर रहे.
चक्षुओं को भले प्रभु आपका दर्शन ना मिला हो,
हम साक्षात् ह्रदय से परमानंद का आभास कर रहे.

अद्भुत है आपका अलंकार देवों में,
स्वयं महादेव भी ये बखान कर रहे.
लाड है, प्यार है माँ पार्वती को आपसे,
जग में शक्ति को प्रभु आप स्वयं सम्पूर्ण कर रहे.

मैं भिखारी हूँ, भिक्षुक हूँ दर का प्रभु आपके,
कृपा है प्रभु आप मुझपे नजर रख रहे.
आपके चरण-कमलों में हो मस्तक मेरा भी,
बस इसलिए प्रभु हम आपका नाम जप रहे.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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